कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 141 of 229
नव निकुंज मन कौ अगम, सेवत कोटि अनंग।
युगल केलि आनंद कौ, तहाँ अखंडित रंग॥
- ब्रज के दोहे
नव निकुंज, जो मन के लिए दुर्गम है, लाखों अंगों की सेवा करता है। युगल आनंद है, जहां है अखंड रंग.. -ब्रज के दोहे