कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 148 of 229

फिरि फिरि राधा-कृष्ण कहि, फिरि फिरि ध्यान लगाइ। फिरिहौं कुंजन बे-फिकिर, कब बृन्दावन जाइ॥ - ब्रज के दोहे बार-बार राधा-कृष्ण कहें, बार-बार ध्यान करें। तो निश्चिंत रहो कुंजन, बृंदावन कब जाओगे.. - दोहा ब्रज से
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की