कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 158 of 229

राचै तो रंग राधिका, बाँचै तो तेहि नाम। याचै तो कीरति कुँवरि, कहा और सो काम॥ - ब्रज के दोहे रंग तो रचती है राधिका, वो तो सिर्फ नाम रचती है। अगर आप कीर्ति कुंवारी से पूछें कि वह काम कहां है? -ब्रज के दोहे
कीच लगी ब्रज खिरक कीराग मुक्त मन शुद्ध ह्वै विगत ज्ञान अज्ञान