कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 16 of 229

बरसाने के वास की, आस करे शिव शेष। जाकी महिमा को कहे, श्याम धरे सखि भेष॥ - ब्रज के दोहे वर्षा के निवास के रूप में, शिव शेष को प्रसन्न करें। जाकी महिमा से कहती है, श्याम मित्र बनकर रहता है.. - braj ke dohe
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की