कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 15 of 229

बंसी वारे मोहना, बंसी तनक बजाय। तेरौ बंसी मन हर्यौ, घर आँगन न सुहाय॥ - ब्रज के दोहे बंसी वारे मोहना, बंसी तनक बाजाय। तेरी बांसुरी से मन प्रसन्न हो जाता है, घर का आंगन सुहाना नहीं लगता... -ब्रज के दोहे
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की