कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 164 of 229

राधा राधा रटत ही, बाधा हटत हज़ार। सिद्धि सकल लै प्रेमघन, पहुँचत नंदकुमार॥ - ब्रज के दोहे राधा राधा रटत हाय, बढ़ हटत हजार। प्रेमघन सिद्धि सकल ले गए, नंदकुमार पहुंचे... -ब्रज के दोहे
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की