कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 172 of 229

राधे तेरे रूप की, पटतर कहिये काहि। कमल कोस अलि ज्यों चलै, नैन कोर तन चाहि॥ - ब्रज के दोहे तेरे रूप की राधे, पातर कहो। जैसे ही अली ने कमाल को कोसना शुरू किया, उसकी आंखें और शरीर तरस गए.. -ब्रज के दोहे
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की