कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 171 of 229

राधे रूप उजागरी, राधे रस की पुंज। राधे गुन गन आगरी, निवसति नवल निकुंज॥ - ब्रज के दोहे राधे का ज्योति स्वरूप,राधे का सार। राधे गुन गण अग्रि, निवसति नवल निकुंज.. -ब्रज के दोहे
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की