कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 174 of 229

रजधानी वृंदा विपिन, भानु सुता कौ राज। प्रवेशहि कहौ ता धाम में, कहा खाइ जमराज॥ - ब्रज के दोहे राजधनी वृंदा विपिन, भानु सुता कौ राज। कहाँ निवास में प्रवेश करूँ, कहाँ जमराज खाऊँ.. -ब्रज के दोहे
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की