कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 175 of 229

रस रस रस रस प्रेम-रस, बरसत व्रज दिन रैन। पल पल पियत आघात नहिं, प्रेम पियासे नैन॥ - ब्रज के दोहे रस रस रस रस प्रेम रस, बरसात का दिन, बरसात का दिन। पल-पल पीने में दर्द नहीं, प्रेम की प्यासी हैं आंखें.. -ब्रज के दोहे
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की