कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 180 of 229
सब धामन को छाँड़ कर, मैं आई वृन्दावन द्वार।
अहो वृषभानु की लाड़ली, अब मेरी ओर निहार॥
- ब्रज के दोहे
सभी धर्मस्थलों को छोड़कर मैं आपके द्वार पर आया हूं। हे वृषभानु पुत्री श्री राधा, अब मुझ पर भी अपनी कृपा दृष्टि डालिये!