कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 183 of 229

संत समागम हरिभजन, राधापद अनुराग। मिलै भक्ति सुर धेनु मोहि, चहौं न मुक्ति छाग॥ - ब्रज के दोहे संत समागम हरिभजन, राधापद अनुराग। मिलें भक्ति सूर धेनु मोहि, चाहौं न मुक्ति छग.. - ब्रज के दोहे
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की