कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 193 of 229

श्री राधा राधा रटत, हटत सकल दुख द्वन्द। उमड़त सुख को सिंधु उर, ध्यान धरत नंदनन्द॥ - ब्रज के दोहे श्री राधा राधा रटत्, हतात् सकल दुःख द्वंद। सुख का आनन्द नदी के समान है, ध्यान पृथ्वी के आनन्द के समान है। -ब्रज के दोहे.
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की