कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 192 of 229

श्री राधा पद भक्ति रस, 'रस वृन्दावन' माँहि। यह राधा रस धवलि है, या में संशय नाँहि॥ - ब्रज के दोहे श्री राधा पाद भक्ति रस, 'रस वृन्दावन' वर्जित है। या राधा का रस धवल है, या हृदय का प्रेम कम है.. - braj ke dohe
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की