कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 213 of 229

वाँह-विहारी की गहों, बसों विहारी धाम। दरस विहारी के करों, रटों विहारी नाम॥ - ब्रज के दोहे वन-विहारी ग्राम, बासों विहारी धाम। दो दरस विहारी, नाम रतन विहारी.. - दोहे ब्रज से
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की