कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 214 of 229

वरष हजारन तप किये, वेद चतुर्मुख गाये। वृज वनीता की चरण रज, ब्रह्मा हूँ नहि पाये॥ - ब्रज के दोहे उन्होंने हजारों वर्षों तक तपस्या की और चारों वेदों की शिक्षा ली। व्रज वनिता के चरणों तक नहीं पहुँच सका, मैं ब्रह्मा हूँ.. - braj ke dohe
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की