कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 223 of 229

वृन्दावन महिमा अमित, वरणि सकै नहिं कोय। डार पात जहँ सबनि मँह, श्रीराधे राधे होय॥ - ब्रज के दोहे वृन्दावन की महिमा अपरंपार है, इससे अन्यथा कोई नहीं कर सकता। हर दिल में बसती हैं श्री राधे... - braj ke dohe
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