कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 222 of 229
वृन्दावन को आसरो, वृन्दावन की आस।
छिन भरको छुटै नहीं, वृन्दावन को वास॥
- ब्रज के दोहे
असारो से वृन्दावन, जैसे वृन्दावन। एक क्षण के लिए भी वृन्दावन मत छोड़ो.. - braj ke dohe
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 222 of 229