कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 228 of 229
यह करुणा की बान लखि, मो हिय अति हुलसात।
बनत बनत बन जायगी, मेरी बिगड़ी बात॥
- ब्रज के दोहे
या दयालुता के शब्द, आप बहुत सुंदर हैं। बनत बनत बनत, मेरी बुरी बात.. -ब्रज के दोहे
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 228 of 229