कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 227 of 229

वृषभानु भवन कौ भाग री, बरसाने कौ भाग। चिर-चिरजीयौ लाडिली, ब्रज जन कौ अनुराग॥ - ब्रज के दोहे कौन दौड़ा वृषभानु भवन, कौन दौड़ा बरसाना। चीरा-चिराजियौ लाडिली, ब्रज जन कौ अनुराग.. -ब्रज के दोहे
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की