कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 23 of 229
ब्रह्म नहीं माया नहीं, नहीं जीव नहिं काल।
अपनी हू सुधि ना रही, रह्यौ एक नंदलाल॥
- ब्रज के दोहे
न ब्रह्म है, न माया है, न जीवन है, न कल है। अब मेरी याद मत करना, अकेले रहना नंदलाल.. - braj ke dohe