कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 32 of 229
ब्रज रज में ये रज मिलि, रज में यमुना नीर।
धन्य भाग्य वा जीव के, जो जामें तजे शरीर॥
- ब्रज के दोहे
यह रहस्य पाया ब्रज रज में, रज में यमुना नीर। धन्य है उस आत्मा का भाग्य, जिसका शरीर जमीन से ताजा है.. -ब्रज के दोहे