कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 44 of 229
चित चिंता तजि, डारिकैं, भार, जगत के नेम।
रे मन, स्यामा स्याम की, सरन गहौ करि प्रेम॥
- ब्रज के दोहे
मेरा मन चिंताओं, बोझों, बोझों, दुनिया के नामों से मुक्त है। रे मन, स्याम स्याम की, सरन गहौ कारी प्रेम.. -ब्रज के दोहे