कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 43 of 229
चितवत जितही लाडिली, तितही मोहनलाल।
सो ठां प्यारी ह्वै गई, देखौ प्रीति की चाल॥
- ब्रज के दोहे
चितावत जिताही लाडिली, तिताही मोहनलाल। तुम कितनी प्यारी हो, देखो प्रीति की चाल... -ब्रज के दोहे