कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 50 of 229
दृग पात्र में प्रेम का जल भरि के, पद पँकज नाथ पखारा करुँ।
बन प्रेम पुजारी तुम्हारा प्रभो, नित आरती भव्य उतारा करुँ॥
- ब्रज के दोहे
सूखी चिट्ठी में प्यार का पानी भर दूं, रंग दूं पंकज नाथ के नाम। प्रेम के पुजारी बनो अपने प्रभु, करो नित महाआरती.. - दोहे ब्रज के