कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 49 of 229
दीनबन्धु ह्वै दीन की, जो तुम नहिं सुध लेत ।
नाम कियो इमि प्रगट किमि, दीनबन्धु केहि हेत॥
- ब्रज के दोहे
प्यारे भाई, दिन भर क्या होता है, इसका तुम्हें ध्यान ही नहीं रहता। दीनबंधु के खातिर मैंने अपना नाम क्यों बताया.. -ब्रज के दोहे