कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 73 of 229

जहँ जहँ मणिमय धरनि पर, चरण धरति सुकुँमारि। तहँ तहँ पिय दृग अंचलनि, पहलेहिं धरहिं सँवारि॥ - ब्रज के दोहे मेरा दिल अनमोल धरती पर है, धरती मेरे चरणों में शांतिपूर्ण है। आँचलनी ने औषधि पिया इधर-उधर, सौन्दर्य है प्रथम.. -ब्रज के दोहे
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की