कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 72 of 229
जहां भक्त मम पग धरे, वहां धरुं मैं हाथ।
पीछे पीछे सदा चलूं, कभी न छाड़ूँ साथ॥
- ब्रज के दोहे
भक्त जहां भी कदम रखता है, मैं वहीं उसका हाथ पकड़ लेता हूं। मैं हमेशा तुम्हारा पीछा करूंगा, तुम्हें कभी नहीं छोड़ूंगा.. - braj ke dohe