कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 84 of 229
जिहि उर-सर राधा-कमल, लस्यौ बस्यौ इहि भाय।
मोहन-भौंरा रैन-दिन, रहै तहाँ मँडराय॥
- ब्रज के दोहे
जिहि उरा-सर राधा-कमल, लस्यौ बस्यौ इहि भय। मोहना-भोंरा, रैना-दीन, मंडराय वहीं रहो.. - braj ke dohe