कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 92 of 229
ज्यों नवशिशु सों वानरी, सद्य जात सुत गाय।
त्यों तव पादपलाक्ष सों, नहिं मो मन बिलगाय॥
- ब्रज के दोहे
बन्दर के नवजात पुत्र की भाँति वह सदैव सोता रहता है। सो पदपालक्ष सो, नहीं मो मन बिलागे.. -ब्रज के दोहे