कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 91 of 229
ज्यों दिन जात अषाढ के, त्यों त्यों घटै मेरी भूख।
बिधिना कब दर्साइहौ, बरसाने के रूख॥
- ब्रज के दोहे
जैसे-जैसे आषाढ़ के दिन बीतते गये, मेरी भूख कम होती गयी। कब है बिधिना दरसैहौ, बरसाने के भाव... -ब्रज के दोहे