कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 94 of 229

कब इन नैंनन ते लखुं, वृंदावन की धूरी। जो रसिकन की परम धन, पावन जीवन मूरी॥ - ब्रज के दोहे जब ये आँखें लाखों हो जाएँगी, वृन्दावन की धुरी। रसिकन परम धन है, जीवन का पवन है, मेरा प्राण है... - दोहे ब्रज से
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की