कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 95 of 229
कबहुँ लाड़िली होत पिय, लाल प्रिया ह्वै जात।
नहिं जानत या प्रेम रस, निशि दिन कहां बिहात॥
- ब्रज के दोहे
तुम कब लड़ने लगते हो प्रियतम, मैं तो प्रियतम बन जाता हूँ। ना प्यार ना प्यार, ये दिन अच्छे नहीं.. - braj ke dohe