कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 97 of 229

कहा करौं हौं मुक्त ह्वै, भक्ति न जँह लवलेश। चहै जग जनमत ही रहौं, बनौं भक्त वृजदेश॥ - ब्रज के दोहे क्या कहूँ आज़ाद हूँ मैं, इश्क़ के सिवा किसी को समर्पित नहीं। हम विश्व के जनमत बने रहें, हम व्रजदेश के भक्त बनें.. - braj ke dohe
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की