नवल कुंज नवनागरी, नव नागर नंदनन्द
Braj Vilasa — श्री ब्रजवासीदास
Verse 1 of 21
अब देहु ब्रज को वास मुहिं प्रभु, आश यह मेरे हिये।
रेणु तृण द्रुम लता खग मृग, होहिं जो तुम्हरे किए॥
- श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास
अब तो जन्म दूं ब्रज को, प्रभु मैं पुत्र हूं। रेनू तृण द्रुम लता खग मृग, जो तुम्हारा है। जारी रखो)।