नवल कुंज नवनागरी, नव नागर नंदनन्द
Braj Vilasa — श्री ब्रजवासीदास
Verse 2 of 21
अब सन्तन की मण्डली, बन्दत हौं शिरनाय।
बिना कृपा जिनकी भये, हरि-यश गाय न जाय॥
- श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास
अब बालकों का समूह, मैं भक्त शिरानाय। कृपा के बिना भय नहीं होता, हरि-यश के बिना जय नहीं होती.. - श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास