चलो लाल खेलें बसंत

Braj Vilasa — श्री ब्रजवासीदास

Verse 6 of 21

(राग वसन्त धीमाताल) चलो लाल खेलें वसन्त मिलि श्रीयमुना के कूल। नव निकुंज वन नई ऋतु आई नये नये फूले फूल॥ [1] द्रुम डारिन बैठे नव पक्षी बोलत अति अनुकूल। ‘नारायण’ उत नई बहार सुख, इतमें तुम सुख मूल॥ [2] - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, वसंत लीला (15) (राग वसंत धीमतला) आओ बजाएँ लाल वसंत मिलि श्रीयमुना की वंशावली। नव निकुंज वन, नव ऋतु, नव नव पुष्प, पुष्प... [1] डमरू के पास बैठे नये पक्षी, बड़ी मित्रतापूर्ण बातें करते हैं। 'नारायण' सुख के स्रोत हैं, इसमें आप ही सुख के स्रोत हैं.. [2] - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, वसंत लीला (15)
नवल कुंज नवनागरी, नव नागर नंदनन्दनवल कुंज नवनागरी, नव नागर नंदनन्द