नवल कुंज नवनागरी, नव नागर नंदनन्द
Braj Vilasa — श्री ब्रजवासीदास
Verse 5 of 21
बार बार मनाय युग पद, नाथ पद माँगहूँ।
ह्वैं रहौं वृंदा विपिन रज, तव चरण पंकज लागहूँ॥
- श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास
मैं अनेक युगों से बार-बार नाथ पद की याचना कर रहा हूँ। क्या कहूँ वृंदा विपिन राज, क्या कहूँ पंकज से.. - श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास