नवल कुंज नवनागरी, नव नागर नंदनन्द
Braj Vilasa — श्री ब्रजवासीदास
Verse 9 of 21
जब परशे प्यारीचरण, परम प्रीति नन्दनंद।
छुट्यो मान हर्षों प्रिया, मिट्यो विरह दुखद्वंद॥
- श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास
जब प्रियतम चरण लांघे, परम प्रेम नंदानंद। मन छोड़ो हर्षो प्रिया, मेरा विरह दुखदायी है.. - श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास