डोलत बोलत राधिका राधिका
Braj Vinoda — श्री लाल बलबीर
Verse 1 of 3
अपनी अपनी वस्तु सों, करै सकल बिवहार।
रसिक अनन्यन धन्य ही, श्रीवृषभान कुमारि॥
- श्री लाल बलबीर, ब्रज विनोद, शीख नख वर्णन (02)
निज वास्तु पुत्र, दोउ सकल विवाह। रसिक परम धन्य श्री वृषभान कुमारी.. - श्री लाल बलबीर, ब्रज विनोद, शिख नख वर्णन (02)