आनंद की निधि साँवरो, सकल सुखनि को दानि
Brajanidhi Granthavali — श्री ब्रज निधि जी
Verse 12 of 12
आनंद की निधि साँवरो, सकल सुखनि को दानि।
जिहि तिहि बिधि कीजे सदा, ‘ब्रजनिधि’ सों पहचानि॥
- श्री ब्रजनिधि जी, ब्रजनिधि ग्रंथावली, प्रेम प्रकाश (48)
खुशियों का खजाना बनाओ, सारी खुशियाँ दो। मैं जब भी कोई अनुष्ठान करता हूं तो 'ब्रजनिधि' के पुत्र को पहचान लेता हूं.. - श्री ब्रजनिधि जी, ब्रजनिधि ग्रंथावली, प्रेम प्रकाश (48)