ब्रजनिधि पद संग्रह

Brajanidhi Granthavali

श्री ब्रज निधि जी · 12 verses · Braj

  1. 1. कुँवरि किसोरी नवल पिय करत परस्पर हेत
  2. 2. कुँवरि किसोरी नवल पिय करत परस्पर हेत
  3. 3. कुँवरि किसोरी नवल पिय करत परस्पर हेत
  4. 4. कुँवरि किसोरी नवल पिय करत परस्पर हेत
  5. 5. श्री राधा सुख चंद देखि
  6. 6. कुँवरि किसोरी नवल पिय करत परस्पर हेत
  7. 7. कुँवरि किसोरी नवल पिय करत परस्पर हेत
  8. 8. या वृंदावन की बानिक याही पै बनि आवै
  9. 9. नित हित चित के माहि, लाल किसोरी रटतु हैं
  10. 10. नित हित चित के माहि, लाल किसोरी रटतु हैं
  11. 11. राधे तुम मोकौ अपनायौ
  12. 12. आनंद की निधि साँवरो, सकल सुखनि को दानि