नित्त सरद नित्त तीज है
Chhutak Pada —
Verse 26 of 35
ललितप्रिये हरिदासि जू, नित्य केलि सुख दानि।
कुँजबिहारिनी लाड़िली, प्रगटी रस की खानि॥
- श्री ललितकिशोरी देव, श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, विशिष्ट पद एवं साखी (65)
ललितप्रिया हरिदासी जू, नित्य सुख दाता। कुंजबिहारिणी लाडिली, प्रगति रस की कथा.. - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, विशिष्ट पाद एवन सखी (65)