नित्त सरद नित्त तीज है
Chhutak Pada —
Verse 28 of 35
नित्त सरद नित्त तीज है, नित्त होरी सु बसंत।
नित्त केलि छिन छिन नई, जाके सुखहि न अंत॥
- श्री ललितकिशोरी देव, श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, विशिष्ट पद एवं साखी (1185)
हर दिन सर्दी है, हर दिन वसंत है, हर दिन वसंत है। नित केलि छिन-छिन नै, जेके सुखी न अंत.. - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, विशेष छंद साम सखी (1185)