नित्त सरद नित्त तीज है
Chhutak Pada —
Verse 29 of 35
रसिक बिहारी सौं बनी, पल नहीं छोड़ै पास।
ना जानौं कब जात है, वन में खेलन रास॥
- श्री रसिक देव जी, श्री रसिक देव जी की वाणी, विशिष्ट पद एवं साखी (16)
रसिक बिहारी सौन बानी, क्षण न चूको। मैं जंगल में जाकर खेलने का आनंद नहीं जानता.. - श्री रसिक देव जी, श्री रसिक देव जी की वाणी, विशेष पोस्ट एवन साखी (16)