नित्त सरद नित्त तीज है

Chhutak Pada —

Verse 30 of 35

रसिक रीति अद्भुत कथी, कुंज केलि रस रास। श्री नरहरिदास प्रताप तैं, रसिकनि दियौ निवास॥ - श्री रसिक देव जी, श्री रसिक देव जी की वाणी, विशिष्ट पद एवं साखी (18) रोमांटिक अंदाज़ में अद्भुत कहानी, चमन की ख़ुशी। श्री नरहरिदास प्रताप ताई, रसिकनी दियौ निवास.. - श्री रसिक देव जी, श्री रसिक देव जी की वाणी, विशेष शब्द एवन साखी (18)
नित्त सरद नित्त तीज हैनित्त सरद नित्त तीज है