नित्त सरद नित्त तीज है

Chhutak Pada —

Verse 34 of 35

तन मन वचननि लाड़िली, मेरी जीवन प्रान। ललित केलि अंग संग सदा, बिहरत रसिक सुजान॥ - श्री ललितकिशोरी देव, श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, विशिष्ट पद एवं साखी (650) शरीर, मन और शब्दों का एक लड़ाकू, मेरा जीवन और आत्मा। ललित केलि अंग संग सदा, बिहार रसिक सुजान.. - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, विशेष पोस्ट एवन सखी (650)
नित्त सरद नित्त तीज हैनित्त सरद नित्त तीज है