नित्त सरद नित्त तीज है
Chhutak Pada —
Verse 35 of 35
उत्तम करै सो लाड़िली, मध्यम हम सौं होइ।
इही बात निस्चै करि, हरि के प्यारे सोई॥
- श्री ललितकिशोरी देव, श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, विशिष्ट पद एवं साखी (107)
यदि आप सर्वश्रेष्ठ करेंगी, महिला, हम औसत दर्जे के होंगे। ऐसा निश्चय करके सो गये हरि के प्यारे... - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, विशेष वचन, एवन सखी (107)