किशोरी मोरी अब न लगाओ बार
Dainy Madhuri — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
Verse 1 of 3
हमारी निधि, श्री वृषभानु दुलार। [1]
जाकी भृकुटि विलास विलोकत, नागर नंदकुमार॥ [2]
ब्रज वीथिन बिच भयो बावरो, राधे राधे पुकार। [3]
विकल नैन दिन – रैन दरस बिन, छिन छिन पंथ निहार॥ [4]
भाग मनावत आपुन कबहुँक, लखौं चरन इक बार। [5]
निज आराध्य ब्रह्म – दुर्गति लखि, लाजत ज्ञानि गमार॥ [6]
मम ‘कृपालु’ आंधे की लाकरि, राधे नाम अधार।[7]
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, प्रेम रस मदिरा, दैन्य माधुरी (93)
हमारा खजाना, श्री वृषभानु दुलार। [1] जाकी भृकुटि विलास विलोकत, नागर नंदकुमार.. [2] ब्रज के भीतर बिच भयो बावरो, राधे राधे पुकार। [3]. [5] मेरे अपने आराध्य ब्रह्मा - दुर्गति लखि, लजत ज्ञानी गमार.. [6] चाचा 'दयालु', अंधों के सहाय, राधे नाम आधार। [7] - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, प्रेम रस मदिरा, दैनिक माधुरी (93)