किशोरी मोरी अब न लगाओ बार

Dainy Madhuri — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

Verse 2 of 3

किशोरी मोरी अब न लगाओ बार, रसिकन मुख सुनी दीन को, आदर यही दरबार। - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, प्रेम रस मदिरा, दैन्य माधुरी (33) किशोरी मोरी, अब मत रोको, मधुर वाणी से सुनो, दिन इस दरबार में मान है। - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, प्रेम रस मदिरा, दैन्य माधुरी (33) हे किशोरीजी, अब मुझ पर दया करो। मैंने आशिकों से सुना है कि तुम्हारी ही अदालत है जहां जान की कद्र होती है।
किशोरी मोरी अब न लगाओ बारकिशोरी मोरी अब न लगाओ बार